Tuesday, September 14, 2021

हिन्दी दिवस -२०२१ / Hindi Diwas 2021-Hindi Ghazal


आरज़ू लखनवी - १८७३-१९५१

 कराची के शायर श्री मान आरज़ू लखनवी ने हिंदी ग़ज़ल का बेहतरीन नमूना पेश किया है | जो लोग हिन्दी ग़ज़ल के नाम से कुछ भी परोस रहे हैं उन को इससे सीख लेनी चाहिए की शुद्ध हिंदी के क्लिष्ट या अकलिष्ट शब्द कैसे प्रयोग करें जिससे ग़ज़ल की चाल-ढाल और नज़ाकत पर रत्ती भर भी फ़र्क न पड़े –

ग़ज़ल

 किसने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी

झूम के आई घटा, टूट के बरसा पानी


कोई मतवाली घटा थी कि जवानी की उमंग

जी बहा ले गया बरसात का पहला पानी


टिकटिकी बांधे वो फिरते है ,में इस फ़िक्र में हूँ

कही खाने लगे चक्कर न ये गहरा पानी


बात करने में वो उन आँखों से अमृत टपका

आरजू देखते ही मुँह में भर आया पानी


ये पसीना वही आंसूं हैं, जो पी जाते थे तुम

"आरजू "लो वो खुला भेद , वो फूटा पानी

1 comment:

सुशील कुमार जोशी said...

शुभकामनाएं हिंदी दिवस की|

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