Thursday, November 11, 2021

प्रताप जरयाल की ग़ज़लें













 संक्षिप्त परिचय
पिता का नाम: श्री खरूदी राम जरयाल
जन्मतिथि : 28-04-1969
शिक्षा : स्नातक , प्रभाकर
प्रकाशित साहित्य : कसक हिन्दी काव्य संग्रह , मधुमास ग़ज़ल संग्रह , दस साझा संग्रहों में रचनाएं प्रकाशित ।पता : गांव व डाकघर बोह, उपतहसील दरीणी , तहसील शाहपुर , जिला कांगड़ा , हिमाचल प्रदेश । पिन कोड -176206
मोबाइल नंबर - 9817768661
ग़ज़ल

जब कठिन रिश्ता निभाना हो गया
दर्द का  दिल  में  ठिकाना हो गया

प्रीत की चादर  पे  शर्तें  जब तनीं
लुप्त  सारा  ताना-बाना  हो  गया

वो  चले  जाने से पहले  कह  गए
खत्म अब  रिश्ता  पुराना हो गया

उन  सुहाने  मौसमों  के  वक्त  को
दिल से गुज़रे इक ज़माना हो गया

हम हकीकत  में न  जा पाए मगर
उनके दर सपनों में जाना हो गया

क्यों मेरी खुशियां जहां को चुभ गईं
हर नज़र का मैं निशाना हो गया

हर कदम सीखा बहुत कुछ ज़िन्दगी
बस तेरा मिलना बहाना हो गया

2

झील की गहराइयों से क्या डराओगे
वक्त की परछाइयों से क्या डराओगे

हम पहाड़ों पर भी नंगे पांव चलते हैं
तुम हमें कठिनाइयों से क्या डराओगे

हमने रांझे का ही तो किरदार भोगा है
प्रीत में रुसवाइयों से क्या डराओगे

भीड़ से हमने किनारा ही किया अक्सर
तुम हमें तन्हाइयों से क्या डराओगे

उम्र के ढलने का मतलब जानता हो जो
झुर्रियों से , झांइयों से क्या डराओगे

गिरने और संभलने में ही ज़िन्दगी बीती
तो बताओ खाइयों से क्या डराओगे

ज़िन्दगी का फैसला स्वीकार है "जरयाल"
तुम कड़ी सुनवाइयों से क्या डराओगे

8 comments:

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' said...

बेहतरीन गज़लें....

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 30 नवम्बर 2021 को साझा की गयी है....
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Anita said...

हम पहाड़ों पर भी नंगे पांव चलते हैं
तुम हमें कठिनाइयों से क्या डराओगे

वाह! बेहतरीन ग़ज़ल

शुभा said...

वाह!लाजवाब 👌

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बेहतरीन ग़ज़लें ।

Subodh Sinha said...


"भीड़ से हमने किनारा ही किया अक्सर
तुम हमें तन्हाइयों से क्या डराओगे" ... व्यवहारिक बातों से लबरेज़ ...

SANDEEP KUMAR SHARMA said...

गहन लेखन...।

Bharti Das said...

बेहद सुंदर कृति