Thursday, September 15, 2016

मेरी एक ताज़ा ग़ज़ल आप सब की नज़्र

ग़ज़ल

हर घड़ी यूँ ही सोचता क्या है?
क्या कमी है ,तुझे हुआ क्या है?

किसने जाना है, जो तू जानेगा
क्या ये दुनिया है और ख़ुदा क्या है?

दर-बदर खाक़ छानते हो तुम
इतना भटके हो पर मिला क्या है?

खोज लेंगे अगर बताए कोई
उसके घर का मगर पता क्या है?

एक अर्जी खुशी की दी थी उसे
उस गुज़ारिश का फिर हुआ क्या है?

हम ग़रीबों को ही सतायेगी
ज़िंदगी ये तेरी अदा क्या है?

मुस्कुरा कर विदाई दे मुझको
वक़्ते-आखिर है , सोचता क्या है?

दर्द पर तबसिरा किया उसने
हमने पूछा था बस दवा क्या है?

बेवफ़ा से ही पूछ बैठे "ख़याल"
क्या बाताये वो अब वफ़ा क्या है?



15 comments:

Kshitij Gour said...

Waaah

Kshitij Gour said...

Waaah

विवेक अंजन श्रीवास्तव said...

Wah

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

वाह वाह
बहुत ख़ूब

Umesh Chandra Shukla said...

Very nice

Umesh Chandra Shukla said...

View my Gazals -
https://ucshukla.blogspot.in/?m=0

Dr.Shrikrishna Raut said...

बहोत अच्छे

pushpendra dwivedi said...

waah bahut khoob

Unknown said...

Bahut umda. .

shaukat ali shaukat said...

क्या बताऊँ मुझे गिला क्या है
सिर्फ़ ग़म के मुझे मिला क्या है
तोड़ के दिल को बेवफ़ा मुझसे
पूछता है तुझे हुआ क्या है

Dilip Kumar said...

बहुत अच्छे ।

Dilip Kumar said...

पहली बार आपको पढ़ा। मैं भी थोड़ी कोशिश कर रहा हूँ । मेरी रचनाएं उपलब्ध हैं इस पर https://merihindirachana.blospot.in

Dilip Kumar said...

पोस्ट करते रहें

Anonymous said...

डूब जाओ ख़ुदा ख़ुदा कहके
जब ख़ुदा है तो नाख़ुदा क्या है

बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई आपकी! बधाई!

Gopalakrishna Annavarapu said...

वाह