Monday, April 6, 2009

मेरे लिये भी क्या कोई उदास बेक़रार है-मिसरा-ए-तरह

अगले तरही मुशायरे के लिये ये "मिसरा-ए-तरह" चुना गया है:

"मेरे लिये भी क्या कोई उदास बेक़रार है "

बहरे- हज़ज मसम्मन मक़बूज़ ( मुज़ाहिफ़ शक्ल)
मुफ़ाइलुन मुफ़ाइलुन मुफ़ाइलुन मुफ़ाइलुन
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काफ़िया : बेकरार
रदीफ़ : है
शायर : शहरयार
फ़िल्म उमराव जान की मशहूर ग़ज़ल)
अपना नाम पता और परिचय ज़रूर भेजें और ग़ज़लें satpalg.bhatia@gmail.com या dwij.ghazal@gmail.com पर भेजें और भेजेने से पहले ग़ज़ल को अच्छी तरह जाँच परख लें, ज़ल्दबाजी न करें.

अपके लिए शहरयार की पूरी ग़ज़ल :

ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है
हद्द-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है

ये किस मुकाम पर हयात मुझ को लेके आ गई
न बस ख़ुशी पे है जहाँ न ग़म पे इख़्तियार है

तमाम उम्र का हिसाब माँगती है ज़िन्दगी
ये मेरा दिल कहे तो क्या ये ख़ुद से शर्मसार है

बुला रहा क्या कोई चिलमनों के उस तरफ़
मेरे लिये भी क्या कोई उदास बेक़रार है

न जिस की शक्ल है कोई न जिस का नाम है कोई
इक ऐसी शै का क्यों हमें अज़ल से इंतज़ार है

इस बहर में और भी खूबसूरत ग़ज़लें हैं जैसे:

चरागो-आफ़ताब गुम बड़ी हसीन रात थी और जवां है रात साकिया, शराब ला शराब ला और निकाह की मशहूर ग़ज़ल
फिज़ा भी है जवां जवां, हवा भी है रवाँ रवाँ सुना रहा है ये समां सुनी सुनी सी दास्ताँ .

पिछले मुशायरे मे 26 शायरों ने एक मिसरा-ए-तरह"कभी इन्कार चुटकी में, कभी इकरार चुटकी में" को इस तरह निभाया :

मुनीर अरमान नसीमी

हमारे रहनुमाओं के अजब *अतवार हैं अरमाँ
कभी इन्कार चुटकी में, कभी इकरार चुटकी में

मोहम्मद वलीउल्लाह वली

सितम कैसा यह करते हो मेरे सरकार चुटकी में
कभी इन्कार चुटकी में, कभी इकरार चुटकी

दिगम्बर नासवा

समझ पाया नहीं मैं अब तलक तेरे इरादों को
कभी इन्कार चुटकी में, कभी इकरार चुटकी में

जोगेश्वर गर्ग

सुना मैंने तुम्हारे शह्र की ऐसी रिवायत है
कभी इन्कार चुटकी में , कभी इकरार चुटकी में

विजय धीमान

हमारा दिल निकलता है , हमारी जान जाती है
कभी इन्कार चुटकी में ,कभी इकरार चुटकी में

डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मी

बदलता रहता है हर दम मिज़ाजे-यार चुटकी में ,
कभी इन्कार चुटकी मे, कभी इक़रार चुटकी मे

चंद्रभान भारद्वाज

हुआ है प्यार 'भारद्वाज' अब इक खेल गुड़ियों का,
कभी इन्कार चुटकी मे, कभी इक़रार चुटकी मे

नवनीत शर्मा

अजब उलझन का ये मौसम कि जानम भी सियासी है
कभी इन्कार चुटकी में, कभी इक़रार चुटकी में

पुर्णिमा वर्मन

कभी इन्कार चुटकी में, कभी इक़रार चुटकी में
कभी सर्दी ,कभी गर्मी, कभी बौछार चुटकी में

ख़ुर्शीदुल हसन नय्यर

वह शोख़ी याद है जाने तमन्ना तुमसे मिलने की
कभी इन्कार चुटकी मे, कभी इक़रार चुटकी मे

पवनेन्द्र पवन

पहाड़ी मौसमों-सा रँग बदलता है तेरा मन भी
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे

डी. के मुफ़लिस

किया, जब भी किया उसने, किया इज़हार चुटकी में
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे

दर्पण शाह ‘दर्शन’

कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे
मरासिम का किया फिर इस तरह इज़हार चुटकी में।

मनु 'बेतख़ल्लुस'

कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे
हज़ारों रंग बदले है निगाहे-यार चुटकी में

योगेश वर्मा स्वप्न

कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे
ज़माना आ गया ऐसा , करो अब प्यार चुटकी में

कवि कुलवंत सिंह

कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे
कनखियों से जो देखा तो हुआ फिर प्यार चुटकी में.

गौतम राजरिषि

कहो सीखे कहाँ से हो अदाएँ मौसमी तुम ये
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे

रजनीश सचान

बदल देता है मेरे दिल का वो आकार चुटकी में,
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे

अमितोश मिश्रा

कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे
किये मरघट हसीनों ने , कई घर-बार चुटकी में

अबुल फ़ैज़ अज़्म सहरयावी

अजब पारा सिफ़त है उसको मैं अब तक नहीं समझा
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे

जगदीश रावतानी

कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे
ज़रा चुटकी उसे काटी पड़ी दीवार चुटकी में

प्रेम भारद्वाज

बड़ी बेताबियाँ देकर बढ़ाई प्रेम की ज्वाला
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे

प्रेमचंद सहजवाला

तुम्हारी इस हसीं आदत का दीवाना हुआ हूँ मैं
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी में

द्विजेन्द्र ‘द्विज’

कभी अँधियार चुटकी में कभी उजियार चुटकी में
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे

प्रकाश "अर्श":

कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे
हमारे प्यार में लटकी है ये तलवार चुटकी में

सतपाल ‘ख़याल’:

भरोसा क्या करें तुझ पर तेरी फ़ितरत कुछ ऐसी है
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे

सियासी लोग हैं इनकी ‘ख़याल’ अपनी सियासत है
कभी इन्कार चुटकी मे,कभी इक़रार चुटकी मे